जो भी मैं कहना चाहूँ
 
बरबाद करें अल्फ़ाज़ मेरे

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Aashiqui 2

Once Upon a Time in Mumbaai

Love Aaj Kal

Jab We Met

Irshad Kamil is a songster of class. Every time he writes, he tries to break the boundaries of generation gap and compels one to think beyond words.  He has command on all genres and his wordplay easily travels the terrains of life, philosophy, romance, patriotism, sensuousness and Sufism. It’s the color of simple words and deep thoughts that paints his writings.  Apart from winning three Filmfares, he has been awarded with the likes of Screen, IIFA, Zee Cine, Apsara, GIMA, Mirchi Music, Big Entertainment and Global Indian Film and Television Award. Having written lyrics for films like Tamasha, Rockstar, Raanjhana &  Sultan etc. he is an engrossing litterateur, who continues to write extensively for literary magazines and newspapers of repute. His criti-analytical book ‘Samkaleen Hindi Kavita: Samay Aur Samaj’ is already well received in the academic circles and a full length play ‘Bolti Deewarein’ is making waves in the theatre arena. His latest offering 'Ek Maheena Nazmon Ka' was his first anthology of 'Roamantic Feelosophy'.

BOOKS

... written so far
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तमाम उम्र के अरमान सीने में दफ़न किये हुए-कभी हम चलते फिरते मज़ार हैं-कभी एक दूसरे को बहुत कुछ करने से रोकती हुईं -चलती फिरती 'बोलती दीवारें'। ऐसी दीवारें जो प्रेम का शोर सुनती हैं, प्रेम पर बात करती हैं, लेकिन उसे अपने तरीक़े से परिभाषित करना भूल जाती हैं। 'बोलती दीवारें' रिश्तों और प्रेम की नयी व्याख्या भी है और व्याख्या की खोज भी।
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साहित्य समाज को प्रभावित करता है - यह उतना महत्त्वपूर्ण नहीं जितना बदलते परिवेश में ये जानना कि काल विशेष में साज भी साहित्य को काम प्रभावित नहीं करता। कविता के विषय में तो ये बात और भी यक़ीनी तौर पे कही जा सकती है। 'समकालीन हिंदी कविता: समय और समाज' पुस्तक में भी समकालीन कवियों की, कविताओं के माध्यम से, इसी काव्य दृष्टि को पकड़ने का प्रयास है।
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'एक महीना नज़्मों का' असलियत के आसमान में रोमानियत की उड़ान है। जवां सोच को लफ़्ज़ों में पिरोती हुई ये नज़्में कभी ख़्यालों का कोहरा बन जाती हैं कभी असलियत की चट्टानें। उम्मीद के धागों पर, बारिश के बाद पानी की बूंदों की तरह तैरते रंग-बिरंगे ख़्वाबों को ज़ुबान देती हैं ये नज़्में। ये नज़्में जो उम्र की हदों को पर करती हुईं सबकी होने की ताक़त रखती हैं।

Sometimes I think

मैंने ख़ुद को मन ही मन कहा इरशाद कामिल दूसरों पे फैज़ साहिब का प्रभाव ढूँढ रहे हो पहले ख़ुद पे देख लो! गुलज़ार साहिब के लेखन पर मिर्ज़ा ग़ालिब का असर साफ़ है लेकिन फैज़ की कलम का लोहा वो भी मानते हैं! वो मानते हैं कि फैज़ साहिब पूरी तहरीक के रहनुमा थे, फैज़ साहिब को समर्पित उनकी एक नज़्म है:

चाँद लाहोर की गलियों से गुज़र के एक शब्

जेल कि ऊंची फ़सीलें चढ़ के

यूँ कमांडो की तरह कूद गया था सैल में 

कोई आहट न हुई

पहरेदारों को पता ही न चला

फैज़ से मिलने गया था ये सुना है

फैज़ से कहने

कोई नज़्म कहो

वक़्त की नब्ज़ रुकी है

कुछ कहो…वक़्त की नब्ज़ चले…!

फैज़ की शायरी के प्रभाव में आये कुछ फ़िल्मी गीतों और गीतकारों की चर्चा ऊपर की और मेरा विश्वास है कि ये चर्चा और बहुत लम्बी चल सकती है जो कुल मिलाकर यही साबित करेगी कि हिंदी फ़िल्मी गीतकार फैज़ की छाया में नहीं बल्कि धूप में हैं और उसकी शायरी से हमेशा थोड़ी बहुत गर्माहट लेते रहे हैं ! किसी गीतकार के किसी गीत पर किसी शायर के किसी ख़्याल का या ज़मीन का असर होना मुझे थोड़ा बुरा तो लगता है लेकिन तकलीफ नहीं देता, वो इसलिए कि मैं ये सोच कर खुश हो जाता हूँ… कम से कम आज का गीतकार किसी शायर को पढ़ तो रहा है!  ख़ैर, जो है अच्छा है और आगे जो होगा वो भी अच्छा ही होगा, उम्मीद पे दुनिया कायम है!

फ़िल्मी गीतों पे अगर नहीं आया तो फैज़ साहिब का इन्क़लाबी रंग नहीं आया! इसका कारण मैं ये मानता हूँ कि हमारे यहाँ देश प्रेम की फिल्में लगभग ना के बराबर बनती हैं, अगर बनें तो शायद वहां भी फैज़ अपना जलवा दिखा दे, क्योंकि वो ऐसा शायर है:

जिसने तहरीक बदलने का ख़वाब देखा था

सूर्ख़ फूलों में भी इंक़लाब देखा था…

#OnFaiz

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... You think

  • Love kush Chaudhary says:

    Jaise apki tehrir ka alag rang h..sabse juda..”jo bhi mai kehna chahu barbaad kare alfaaz mere”

  • Sameer Meena says:

    Very Nic Thought
    .

    By Irshad Sir

    Thnx For This Quit

  • Irshad Kamil says:

    Love Kush, Aapka bahut shukriya.

  • Rohan Agrawal says:

    Every poet writes his heart out, for him his poems are not just collection of words but an emotion which he intends to pass it on to his listeners, you have given Hindi cinema some evergreen hits, I am one amongst many admirer of your poems. The one that really has engraved in my heart is BULLEYA from sultan. Thank you such a great writing.

  • Sirajunnisha Malek says:

    Jo bhi main kehna chahu barbaad kare alfaaz mere. ..it happens to me,sir..I write everyday.. but I think my words can not express my thoughts effectively. ..

  • Sirajunnisha Malek says:

    Sir, I write stories and poems but I think my words can’t express properly what I really want to say …Inshallah zindagi mein jab bhi mauka mile,Aap se shikhna hai…

  • Sirajunnisha Malek says:

    Shukriya reply karne k liye,sir.I am from Gujarat.English literature padha hai. Philosophical books padhti hu.Mirza galib , Amir Khusro,Gujarat k Mariz, Befaam ko padhti hu,sir.Aur ye jaanti hu k achha likhne k liye achha padhna aur bahut padhna jaruri hai.Allahrasul (s.a.w.) aap se rubaru milne ka mauka de tab tak kya aap online thodi help kar diya karenge?Agar mumkin ho toh…(haala ki ye jaanti hu k ye impossible hai,lekin ye bhi maanti hu k muqaddar mein likha ho toh positive answer bhi mil jaaye)It will help me lot.Main twitter par aap ki follower hu.Plz apni taraf se koi book bataayiye jo padhni chahiye for hindi poems

  • Irshad Kamil says:

    Sirajunnisha Malek, Hindi mein bahut se achhe kavi hain. Aap shuruat Mahadevi Verma, Sarveshwar Dayal Sexena aur Uday Prakash se kar sakti hain. Yeh teenon alag alag peedhi ke kavi hain.

  • ankit sengar says:

    सर प्रेरित हूँ मैं बहुत आपसे
    आपकी लिखी हर बात से
    चुनना चाहता हूँ कुछ पत्ते
    आपके शब्द ज्ञान की शाख से

  • Ankit sengar says:

    सूफी प्रेम है

    भवरे का फूल से
    गुमनाम का मकबूल से
    शिक्षा का स्कूल से
    इज्जतदार का ऊसूल से
    मीरा का कृष्ण से
    राख का अग्न से
    नीदों का ख्वाब से
    द्रष्टि का आँख से
    जुबां का आवाज़ से
    सुरों का साज़ से
    जिस्म का परछाई से
    बच्चे का माई से
    जड़ का पेड़ से
    मंजिल का मेड़ से
    बारिश का बादल से
    कालिख का काजल से
    दीपक का रौशनी से
    राग का रागनी से
    इत्र का खुशबू से
    शिष्य का गुरु से
    ईश्वर का प्रार्थना से
    संत का साधना से
    काव्य का कवि से
    श्रृंगार का रति से
    खुशी का मुस्कान से
    सूरज का आसमान से
    मिट्ठी का धरती से
    सर्द का सर्दी से
    हिमालय का बर्फ से
    चन्दन का सर्प से
    दुआ का अर्ज़ से
    पिता का फर्ज़ से
    कागज़ का कलम से
    सुकून का मरहम से
    महबूब का सनम से
    ज़िन्दगी का जन्म से
    पंछी का उड़ान से
    मुनि का ध्यान से
    पर्वत का ऊंचाई से
    मन्नत का दुहाई से
    खुदा का खुदाई से
    अंकित का स्याही से

    मेरे वर्तमान ज्ञान की वाणी यही कहती है कि
    जिसका आस्तित्व सौंदर्य के आयाम सहित
    एक दूसरे के बिना अधूरा है वही सूफी है।

    सर माना की हर कवि का नज़रिया अपना होता है।
    मगर हर नज़रिया सही है ये ज़रूरी नही। क्या ये सही है या नही ? कृपया बताएं ज़रूर।

  • devanshi desai says:

    sir your SAFAR song is just marvellous!!!

  • Irshad Kamil says:

    Divans Thanks a Lot.

  • Pradeep kumar says:

    Namastey sir…aapke geet lakho baar sunta hun mann barta hi nhi maane kyu.. sadda haq ,ye dooriyaan ,tu jaane na, agar tum saath hun aur bahut se geet hai jo dil ko sakoon dete hai…lajwab …haan ye bhi jaanta hoon likhna bahut mushkil kaam hain. Aapse milne ki bahut tamnna hai..

  • Gaurav Patil says:

    Irshad Sir ye jo aap likhte ho kasam se aisa mehsoos karati hai ki bas sab chod chad ke ye geet sunte hi jaye
    aur kho jaye shantidham me..

  • Irshad Kamil says:

    Pradeep, Bahut Shukriya. Geet sunte rahein.

  • Irshad Kamil says:

    Gaurav, Sangeet sich mein Shanti deta hai. Shukriya.

  • Arpan patel says:

    Hello sir…main aapka aur sameer ji ka bahut bada fan hu…sameer ji ne love song superb likhe hai..aapne bhi superb likhe hai…love songs likhte rahiye…..

  • Love kush Chaudhary says:

    हैलो सर,

    मेरा नाम लवकुश है, मैं आपका बहुत बड़ा प्रशसंक हूँ। मैं भी लेखक हूँ और आपकी तरह साहित्य की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहता हूँ।

    सर, “एक महीना नज़्मों का” से पहले भी मैंने आपकी कई किताब पढ़ी व लगभव सारे गीत सुने ।आपके ख्याल , सोच , अंदाज़ सच में सब से जुदा हैं। मैं आपकी तहरीर का दिल से मुरीद हूँ।

    सर, “एक महीना नज़्मों का” से पड़ोस की छत पर, चिराग़, अगला मोड़, निम्मो, ख़त, दस्तूर,बच्ची मिट्टी प्यार, ख्वाईश व अन्य कई मेरे दिल के बहुत करीब हैं। पर कुछ नज़्में मेरी समझ से परे हैं जैसे “सूखे होंठ” । बार बार पड़ने पर भी इसका मुक़म्मल ख्याल मैं समझ नहीं पा रहा हूँ। रात भर इस नज़्म के मिसरे बड़बड़ाता रहता हूँ पर सिर्फ उलझता ही हूँ।

    सर, कोई नहीं है जो मुझे बता सके समझा सके , इसलिए सोचा कि आपसे बात की जाए। सर , हो सके तो मुझे ये नज़्म “सूखे होंठ” विस्तार से समझाने की कृपा करें।

    आपका प्रशंसक
    लवकुश चौधरी

  • ankit sengar says:

    शायद मेरे कम-मकबूल शब्दों की आवाज़ आप तक नहीं पहुंची।
    मुझे लगता है इन राहों में कहीं खो गई ,आज तक नहीं पहुंची।।

    लाखों की भीड़ में ही खो गए शायद वो लब्ज़ जिनकी फरियाद तक नहीं पहुंची।
    माना इरशाद सर मामूली हैं मेरे सवाल जिनकी बात आपके शिखर-ए-एहसास तक नहीं पहुंची।।

    अपनी राहें बुन रहा हूँ सिर्फ फर्क है कि मेरी तलाश आपकी तलाश तक नहीं पहुंची।
    कुछ कतरे मांगे आपके अनुभव के ,मगर आपकी नज़र मेरी कला की साख तक नहीं पहुंची।।

    सोचा मुझ पौधे को कुछ अपने ज्ञान की बूंदे देंगे,मगर आपकी बारिश मेरी प्यास तक नही पहुंची।
    शायद मेरे कम-मकबूल शब्दों की आवाज़ आप तक नही पहुंची।।

  • Ammar Ahmed says:

    सर, मैं कई सालों से आपके लिखै हुए गीत सुन रहा हूँ। मैं हक्सले, गानें लिखने का शौक़ रखता हूँ। मुझे बताएँ की आपकी कौनसी किताब को पढूं कि मैं और बेहतर लिख सकूँ।

  • Aradhana yadav says:

    Sir aap bahut acche gaane ar poem likte hai…thanku sir itne dil ko Chu jane wale sabd likne Kai liye… sir Mai bhi aap sai prena lekar poems ar quotes likti Hu jisse mujhe sukun milta hai…sir aap Sai Milne Ki kwahish hai…kuch shikne Ki chaht h aap Sai…ku Ki aap bahut samvednsheel writer hai Jo dil ke jakmo ko kalm Sai baya kar dete hai…sir mujhe apna ashirwad digie …aap meri prena hai… some line for u only… Tareef karu kya Teri..tu hai uspaar tareefo ke …Kaha Kisi kalm Mai takat aisi …Jo likh de Tere jaisi…khuda nai baksi tujhko niyat aisi…kalmo Sai jhdti Jo fuloo jaise…Hridai cheer Kai rakh dete hai Jo..Kaha Kisi ar Mai samvedna aisi Irshad kamil jaisi.. sir thanku

  • Aagam Shah says:

    Usne mujhe apna yaar naa sahi ,
    Shahyar toh Bana hi diya !

    Sir aapka yogdaan sahitya ke Kshetra nai atuliya hai
    Aapko koti koti vandan .

  • Aakash Deep says:

    “Kuch baat h to keh do
    Me hr baat mi tumhare saath hu ” these line of my one poem VO SHEHER inspired me to write a complete plot (In form of short story) to say this one line.
    And Irshad sir I LOVE YOU

  • Shravan Kumar says:

    सर, आपके गीतों में जो भाव है, वैसे ही भाव आपके लिखे गीतों को सुनने से मुझमें आते हैं, ऐसा संभव है. मैं आपका शुक्रगुजार हूँ, मेरे मन की भावों को शब्दों में मुझे सुनने देते है. क्या ये सच है आप मन के भाव पढ़ते है.

  • Irshad Kamil says:

    लवकुश, सबसे पहले मेरी नज़्में पसंद करने के लिए बहुत शुक्रिया।
    उसके बाद जहाँ तक नज़्में या कवितायेँ समझाने की बात है तो दोस्त ये अपने आप समझी जाती हैं। ये भी एक तरह का सफ़र है जिसका अलग मज़ा है।

  • Irshad Kamil says:

    अम्मार, मेरी किताब का नाम ‘एक महीना नज़्मों का’ है। पता नहीं वो किताब किसी को कुछ सीखा सकती है या नहीं।

  • Irshad Kamil says:

    Aradhana, Bahut shukriya aapka. Likhte rahein, Allah kare zor-e-qalam aur zyada.

  • Irshad Kamil says:

    Aagam, Shayad sirf aap hi aisa samajhte hain:-) Bahut Shukriya.

  • Irshad Kamil says:

    श्रवण, मैं मन के भाव पढ़ने की कोशिश तो करता हूँ। कभी सफल कभी असफल।

  • Irshad Kamil says:

    अंकित, वाह।

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