December 26, 2009

Geet, Geetkaari Aur Faiz-8

मैंने ख़ुद को मन ही मन कहा इरशाद कामिल दूसरों पे फैज़ साहिब का प्रभाव ढूँढ रहे हो पहले ख़ुद पे देख लो! गुलज़ार साहिब के लेखन पर मिर्ज़ा ग़ालिब का असर साफ़ है लेकिन फैज़ की कलम का लोहा वो भी मानते हैं! वो मानते हैं कि फैज़ साहिब पूरी तहरीक के रहनुमा थे, फैज़ साहिब को समर्पित उनकी एक नज़्म है:

चाँद लाहोर की गलियों से गुज़र के एक शब्

जेल कि ऊंची फ़सीलें चढ़ के

यूँ कमांडो की तरह कूद गया था सैल में 

कोई आहट न हुई

पहरेदारों को पता ही न चला

फैज़ से मिलने गया था ये सुना है

फैज़ से कहने

कोई नज़्म कहो

वक़्त की नब्ज़ रुकी है

कुछ कहो…वक़्त की नब्ज़ चले…!

फैज़ की शायरी के प्रभाव में आये कुछ फ़िल्मी गीतों और गीतकारों की चर्चा ऊपर की और मेरा विश्वास है कि ये चर्चा और बहुत लम्बी चल सकती है जो कुल मिलाकर यही साबित करेगी कि हिंदी फ़िल्मी गीतकार फैज़ की छाया में नहीं बल्कि धूप में हैं और उसकी शायरी से हमेशा थोड़ी बहुत गर्माहट लेते रहे हैं ! किसी गीतकार के किसी गीत पर किसी शायर के किसी ख़्याल का या ज़मीन का असर होना मुझे थोड़ा बुरा तो लगता है लेकिन तकलीफ नहीं देता, वो इसलिए कि मैं ये सोच कर खुश हो जाता हूँ… कम से कम आज का गीतकार किसी शायर को पढ़ तो रहा है!  ख़ैर, जो है अच्छा है और आगे जो होगा वो भी अच्छा ही होगा, उम्मीद पे दुनिया कायम है!

फ़िल्मी गीतों पे अगर नहीं आया तो फैज़ साहिब का इन्क़लाबी रंग नहीं आया! इसका कारण मैं ये मानता हूँ कि हमारे यहाँ देश प्रेम की फिल्में लगभग ना के बराबर बनती हैं, अगर बनें तो शायद वहां भी फैज़ अपना जलवा दिखा दे, क्योंकि वो ऐसा शायर है:

जिसने तहरीक बदलने का ख़वाब देखा था

सूर्ख़ फूलों में भी इंक़लाब देखा था…

#OnFaiz

9 responses to “Geet, Geetkaari Aur Faiz-8”

  1. Love kush Chaudhary says:

    Jaise apki tehrir ka alag rang h..sabse juda..”jo bhi mai kehna chahu barbaad kare alfaaz mere”

  2. Sameer Meena says:

    Very Nic Thought
    .

    By Irshad Sir

    Thnx For This Quit

  3. Irshad Kamil says:

    Love Kush, Aapka bahut shukriya.

  4. Rohan Agrawal says:

    Every poet writes his heart out, for him his poems are not just collection of words but an emotion which he intends to pass it on to his listeners, you have given Hindi cinema some evergreen hits, I am one amongst many admirer of your poems. The one that really has engraved in my heart is BULLEYA from sultan. Thank you such a great writing.

  5. Sirajunnisha Malek says:

    Jo bhi main kehna chahu barbaad kare alfaaz mere. ..it happens to me,sir..I write everyday.. but I think my words can not express my thoughts effectively. ..

  6. Sirajunnisha Malek says:

    Sir, I write stories and poems but I think my words can’t express properly what I really want to say …Inshallah zindagi mein jab bhi mauka mile,Aap se shikhna hai…

  7. Sirajunnisha Malek says:

    Shukriya reply karne k liye,sir.I am from Gujarat.English literature padha hai. Philosophical books padhti hu.Mirza galib , Amir Khusro,Gujarat k Mariz, Befaam ko padhti hu,sir.Aur ye jaanti hu k achha likhne k liye achha padhna aur bahut padhna jaruri hai.Allahrasul (s.a.w.) aap se rubaru milne ka mauka de tab tak kya aap online thodi help kar diya karenge?Agar mumkin ho toh…(haala ki ye jaanti hu k ye impossible hai,lekin ye bhi maanti hu k muqaddar mein likha ho toh positive answer bhi mil jaaye)It will help me lot.Main twitter par aap ki follower hu.Plz apni taraf se koi book bataayiye jo padhni chahiye for hindi poems

  8. Irshad Kamil says:

    Sirajunnisha Malek, Hindi mein bahut se achhe kavi hain. Aap shuruat Mahadevi Verma, Sarveshwar Dayal Sexena aur Uday Prakash se kar sakti hain. Yeh teenon alag alag peedhi ke kavi hain.

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